Friday, March 30, 2012

UPTET : TET Candidates Demanded Selection Through TET Merit




भर्ती टीईटी मेरिट पर करने की मांग
(UPTET : TET Candidates Demanded Selection Through TET Merit)

गोरिया बाजार। महराजगंज ब्लाक के परशुरामपुर बाजार में टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की बैठक गुरुवार को हुई। इसमें प्रदेश सरकार से शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट के आधार किये जाने की मांग की गयी। हीरा यादव ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट के आधार पर ही होनी चाहिए अन्यथा शिक्षकों की भर्ती में नकल करके पास होने वाले अयोग्य लोग ही पहुंचेंगे। विनोद कुमार ने कहा कि नियुक्ति पूर्व प्रकाशित विज्ञप्ति के आधार पर ही होनी चाहिए। चंदन सिंह ने कहा कि टीईटी परीक्षा में हुई धांधली की जांच होनी चाहिए लेकिन वे लोग जो अपनी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए हैं उनके साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए। बैठक में अवनीश सिंह, रामाश्रय सिंह, राकेश, उमेश राम, आशुतोष, सूर्यभान, शशिभूषण, राकेश राय आदि लोग उपस्थित थे।
बिंद्राबाजारः टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की बैठक बुधवार को विकास खंड मुहम्मदपुर के परिसर में हुई। इसमें भर्ती प्रक्रिया को टीईटी मेरिट पर कराने की मांग मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से की गई। इस मौके पर रामजतन यादव, छोटेलाल यादव, मो. आरिफ, अशोक सिंह, महेंद्र, राकेश आदि थे।


शांति मार्च निकालने का लिया निर्णय
अहरौला। टीईटी उत्तीर्ण संघ मोर्चा अहरौला की बैठक गुरुवार को राम जानकी मंदिर परिसर में विरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें एक अप्रैल को सुबह नौ बजे शांति मार्च निकालने का निर्णय लिया। श्री सिंह ने बताया कि मार्च बीआरसी कार्यालय अहरौला से पकड़ी, अहरौला, मंडना आदि क्षेत्रों से होते हुए बीआरसी कार्यालय के सामने जनसभा के रूप में तब्दील हो जाएगा। मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन बूढ़नपुर के एडीएम और एसओ अहरौला के माध्यम से प्रेषित किया जायेगा। रामनारायन गुप्ता, भूपेंद्र पांडेय, प्रेमचंद्र, राणा राहुल सिंह, इम्तियाज, अमर, विरेंद्र प्रताप, रसल रघुवंशी आदि मौजूद थे।






टीईटी प्रकरण शक की सुई शिक्षा माफिया पर 
बाह। घर बैठे 33 शिक्षक-शिक्षिकाओं को पगार देने के मामले में अमर उजाला के खुलासे से मामले में तिगड़म भिड़ाने वाले लोगों में खलबली मच गई है। पूरे खेल के पीछे एक शिक्षा माफिया की साजिश बताई जा रही है, जो उसने वजीफा घोटालों से बचने के लिए रची थी। प्रकरण में खंड शिक्षा अधिकारी संजय सिंह पूछताछ और उनके विरुद्ध जांच में तेजी आ सकती है।
टीईटी प्रकरण की एक और परत खुलने पर पता चला है कि मामले में एक बड़ी राजनैतिक पार्टी का नेता भी शामिल है। आशंका जताई जा रही है कि सालों से बंद विद्यालय की छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में कार्रवाई न किए जाने पर शिक्षा माफिया ने खंड शिक्षाधिकारी के साथ मिलकर प्रकरण को अंजाम दिया। फिलहाल जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


नए भवन में आज से बैठेंगे माध्यमिक शिक्षा निदेशक



लखनऊ। नए माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव शुक्रवार से पार्क रोड स्थित नव निर्मित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के नए शिविर कार्यालय भवन में बैठेंगे। 28 मार्च को कार्यभार ग्रहण करने के बाद यादव ने अधिकारियों से नये भवन में निर्मित निदेशक कक्ष में कार्यालय शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। ऐसे में नए भवन में निदेशक कार्यालय को शिफ्ट कर दिया गया है। बता दें कि निदेशालय का नया भवन बने हुए करीब एक साल होने को है बावजूद इसके निदेशक कार्यालय को नये भवन शिफ्ट नहीं किया गया। अब तक निदेशक पद पर रहे तीन अधिकारी पुरानी बिल्डिंग में ही बैठते रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि नया भवन बनने के बाद से निदेशालय में तीन निदेशक बदल चुके हैं। इसमें टीईटी मामले में फंसे पूर्व निदेशक संजय मोहन के अलावा पूर्व दिनेश चन्द्र कनौजिया और सीपी तिवारी शामिल हैं। लेकिन किसी निदेशक ने नए भवन में निदेशक कार्यालय को शिफ्ट नहीं करवाया।



प्रेमलता बनीं एडी माध्यमिक, अमरनाथ हटाए 
इलाहाबाद (ब्यूरो)। कार्यभार संभालने के 24 घंटे के भीतर नए निदेशक वासुदेव ने निदेशालय में बड़ा फेरबदल कर दिया। कई मामलों में आरोपों से घिरे रहे अपर निदेशक माध्यमिक अमरनाथ वर्मा को हटा दिया गया और एडी महिला पद पर तैनात डॉ.प्रेमलता सिंह को एडी माध्यमिक का चार्ज सौंप दिया गया। डॉ.प्रेमलता ने गुरुवार को ही कार्यभार संभाल लिया जबकि अमरनाथ वर्मा को उनके मूल पद जेडी इलाहाबाद पर भेज दिया गया। जीजीआईसी प्रवक्ता चयन में गंभीर अनियमितता के आरोपों के कारण अमरनाथ वर्मा पर यह कार्रवाई हुई।
इसके अलावा विभाग के ही कुछ अधिकारियों ने लिखित तौर पर उन पर टीईटी घोटाले में संजय मोहन का सहयोग करने के आरोप लगाए थे।
संयुक्त शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा 2007 में बसपा सरकार बनने पर चर्चा में आए थे। जून 2007 में हाईस्कूल का परिणाम घोषित होने के आधे घंटे बाद ही तत्कालीन सचिव वासुदेव यादव को हटाकर अमरनाथ वर्मा को बोर्ड सचिव बना दिया गया था। वह ज्यादा समय तक इस पद पर नहीं रह सके। बाद में माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर उन्हें एडी माध्यमिक बना दिया।
जीजीआईसी में प्रवक्ताओं की सीधी भर्ती को लेकर एडी माध्यमिक पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगे। बाद में टीईटी घोटाले में संजय मोहन के जेल जाने के बाद जब अन्य अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हुई तो प्रभा त्रिपाठी के बाद विभागीय लोगों ने अमरनाथ वर्मा का भी नाम लिया। सीधे तौर पर आरोप साबित न होने के कारण शासन ने उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की लेकिन एडी के पद से हाथ धोना पड़ा।
डॉ.प्रेमलता को एडी माध्यमिक का चार्ज देने के बाद नए निदेशक वासुदेव यादव ने निदेशालय में अधिकारियों की बैठक बुलाई। निदेशक ने चेतावनी दी कि शिक्षकों या अन्य कर्मचारियों की तरफ से निदेशालय में गड़बड़ियों की जानकारी मिली तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।



News : Amar Ujala (30.3.12)


No comments:

Post a Comment

To All,
Please do not use abusive languages in Anger.
Write your comment Wisely, So that other Visitors/Readers can take it Seriously.
Thanks.