Sunday, June 2, 2013

UPTET: फिर फंसीं संबद्ध प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियां


UPTET: फिर फंसीं संबद्ध प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियां

Recruitment in Govt. Aided School Again Blocked

UPTET News Specific Blog - http://joinuptet.blogspot.com


कानपुर  : संबद्ध प्राथमिक स्कूलों में खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्तियां फिर खतरे में पड़ गई हैं। हरजेंदर नगर इंटर कालेज में तीन जून को प्रस्तावित साक्षात्कार फिलहाल टाल दिया गया है

जिले में एक दर्जन से अधिक इंटर कालेजों से संबद्ध प्राथमिक स्कूलों में वर्षो से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।

 इस बीच शासन ने इन पदों को भरने की बार बार व्यवस्था बदली। 
पहले शासनादेश जारी हुआ कि शासन की पूर्व अनुमति के बिना प्रबंधतंत्र खाली पदों पर नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। 

कई प्रबंधकों ने अनुमति के लिए आवेदन किया पर शासन ने किसी को अनुमति नहीं दी। इस बीच शासन ने खाली पदों को भरने की अनुमति देने का अधिकार जिला विद्यालय निरीक्षकों को दे दिया तो नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। 

यहां हरजेंदर नगर इंटर कालेज, माया देवी मोहन विद्यामंदिर बालिका इंटर कालेज समेत कुछ और कालेजों को नियुक्ति की अनुमति दी गई। 

कालेजों के दिए विज्ञापन में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया। 
उनका तर्क है कि हरजेंदर नगर इंटर कालेज में पहले भी इन पदों को भरने का विज्ञापन दिया गया था तब टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी

 शिक्षा अधिकार अधिनियम में भी संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता नहीं है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी जाए। 
कोर्ट ने इसपर जिला विद्यालय निरीक्षक से जवाब लगाने को कहा है। इसी के चलते हरजेंदर नगर इंटर कालेज में प्रस्तावित 3 जून का साक्षात्कार टाल दिया गया। दूसरे कालेजों के प्रबंधकों को भी कोर्ट के फैसले का इंतजार है। 

उधर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि हाईकोर्ट ने टीईटी की अनिवार्यता पर तो फैसला दे दिया है पर टीईटी अर्हता मानी जाएगी या मेरिट पर नियुक्तियां होगी का फैसला आना शेष है

 जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्तियां कैसे की जा सकती हैं?

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कोर्ट में मामला जाने से साक्षात्कार की तैयारी नहीं हो पाई, इसीलिए टाला गया। नई तिथि 10 जून प्रस्तावित है।

-बलराम सिंह ओबेराय, अध्यक्ष हरजेंदर नगर कालेज प्रबंध समिति



News Source / Sabhaar : Jagran (02 Jun 2013 )
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News Analysis -
Recently Allahabad High Court Triple Bench Suggested to Adopt Some Guidelines Related to NCTE specified TET exam, And it Appears that Schools are Awaiting Government Order Regarding Such Issues.

Such issues will effect entire Government Aided Schools in Uttar Pradesh. So wait and watch to see what happens for such issues.

UPTET : शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी जरूरी


UPTET : शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी जरूरी




बेसिक शिक्षा परिषद के कक्षा एक से पांच तक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर भर्ती के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य है।


हाईकोर्ट की वृहद पीठ ने श्शिवकुमार शर्मा सहित कई अन्य की याचिकाओं व अपीलों को निस्तारित करते हुए अपने फैसले में 23 अगस्त 2010 के बाद शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी को हर हाल में जरूरी माना है। दरअसल 16 जनवरी 2013 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता को खारिज कर दिया था। डिवीजन बेंच ने 50 फीसदी अंकों के साथ स्नातक और बीएड डिग्रीधारकों को बिना टीईटी पास किए ही शिक्षक भर्ती में मौका दिए जाने का आदेश दिया था। उसके बाद 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती में नया विवाद पैदा हो गया था।

विवाद पर लगा विराम

मृतक आश्रितों को नहीं मिली राहत
23 अगस्त 2010 के बाद सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी  से छूट मांग रहे मृतक आश्रितों को काई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने माना है कि जो भी नियुक्तियां सहायक अध्यापक पद के लिए होंगी उन्हें टीईटी पास करना जरूरी है। भले ही ऐसे आवेदक मृतक आश्रित कोटे के दायरे में आते हों।

बगैर टीईटी नियुक्त 20 हजार को राहत
टीईटी की अनिवार्यता का वृहद पीठ का फैसला शिक्षामित्रों पर भी लागू होगा। शिक्षामित्रों को पत्राचार माध्यम से बीटीसी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति होनी है। अधिकतर शिक्षामित्र नियुक्तित को समायोजन मानकर चल रहे हैं और इसलिए टीईटी से अपने को मुक्त मान रहे थे


News Source / Sabhaar : Livehindustan.com (1.6.2013)
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Now it is expected that 72825 teacher Recruitment happens after Allahabad High Court Double Bench Judgement.

And new advertisement for Juinor Teacher (29333 approx) may come after UPTET 2013 Exam and for this recruitment chances can be POSSIBLE that TET Marks Weightage can be taken + Gunak/ Acad. marks Weighatge.

As Allahaabd HC Triple Bench Strongly favours NCTE guidelines dated 11th Feb 2011 of TET exam , where weighate of marks is selction mentioned.

See NCTE Guidelines dated 11th Feb 2011 - http://www.ncte-india.org/RTE-TET-guidelines[1]%20(latest).pdf

What Allahabad High Court Triple Bench  says -

We wish to clarify that the binding effect of the notifications and the guidelines is such that the weightage which is contemplated under the guidelines dated 11th February, 2011 cannot be ignored. The minimum score that is required of a candidate is 60% to pass the teacher eligibility test. A concession of 5% has been made in favour of the reserved category candidates including the physically challenged and disabled persons.

This norm therefore cannot be diluted. Apart from this, the State Government has to take notice of the fact that weightage has to be given in the recruitment process as well. It is for the State Government to suitably adopt the said guidelines and we do not wish to add anything further at this stage as we are only concerned with the essentiality of the qualification of the teacher eligibility test to be possessed by any candidate aspiring to be appointed as a teacher.

We wish to make it clear that the law has to be followed in the manner in which it has been legislated. It cannot be diluted on account of the inaction of the State. In such circumstances all teachers whose appointment relate to the period after 23.8.2010 have to be possessed of TET.

UPTET : आज का विचार


UPTET : आज का विचार 


जिस प्रकार इलाहबाद ट्रिपल बेंच का निर्णय आया है उस से एक बार फिर टी ई टी मेरिट से भर्ती की संभावनाएं प्रबल हो गयी हैं ,
हालाँकि अगर इलाहबाद डबल बेंच ने टी ई टी मेरिट के पक्ष में फेसला दिया तो भर्ती में अनुमानत ४-५ महीने से कम समय नहीं लगेगा -
कारण -
१. राज्य सरकार ने बहुत से अभ्यर्थीयों का आवेदन शुल्क वापस कर दिया है 
२. राज्य सरकार को नयी व्यवस्था के अंतर्गत तयारी करनी पड़ेगी 
३. इलाहबाद डबल बेंच के फेसले में भी समय लग सकता है जो कि अनिश्चित है 

अगर इलाहबाद डबल बेंच टी ई टी मेरिट के विरोध में फेसला देती है तो कुछ सूत्रों के हवाले से सुना जा रहा है कि टी ई टी मेरिट 
वालों ने सुप्रीम कोर्ट में केवीट लगाई हुई है और शायद मामला आगे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है । 

राज्य सरकार की आगामी भर्तियों में सम्भावना इस बात  की है की भर्ती में टी ई टी मार्क्स का वेटेज + गुणांक वेटेज को जोड़ा जा सकता है । 


N.C.T.E. dated 11th February, 2011. Clause 9, provides for the minimum marks for qualifying TET Examination as 60%. Clause 9(b) provides that the State or the appointing authority may provide weightage as per the TET Score to the candidates in the recruitment process. It is further stated that the State Government has accepted the guidelines so framed by the NCTE as is apparent from its letter dated 7th September, 2011 and therefore, the State Government has to provide weightage with reference to the TET Score of the candidates

Now Allahabad Highcourt Triple Bench Says about this -

1. We wish to clarify that the binding effect of the notifications and the guidelines is such that the weightage which is contemplated under the guidelines dated 11th February, 2011 cannot be ignored. The minimum score that is required of a candidate is 60% to pass the teacher eligibility test. A concession of 5% has been made in favour of the reserved category candidates including the physically challenged and disabled persons.
This norm therefore cannot be diluted. Apart from this, the State Government has to take notice of the fact that weightage has to be given in the recruitment process as well. It is for the State Government to suitably adopt the said guidelines and we do not wish to add anything further at this stage as we are only concerned with the essentiality of the qualification of the teacher eligibility test to be possessed by any candidate aspiring to be appointed as a teacher. 

We wish to make it clear that the law has to be followed in the manner in which it has been legislated. It cannot be diluted on account of the inaction of the State. In such circumstances all teachers whose appointment relate to the period after 23.8.2010 have to be possessed of TET.



A long time back, Allahabad High court not objected 100% TET marks i.e. TET merit for selection,
See - For Complete Judgement Click Here - http://naukri-recruitment-result.blogspot.in/2012/01/uptet-petition-against-selection-on.html

UPTET : Petition against selection on the basis  of TET Marks is Dismissed
इलाहाबाद हाईकोर्ट : टी ई टी मार्क्स / मेरिट से सेलेक्सन के विरोध की याचिका ख़ारिज

 can be construed as contrary to the guidelines issued by National Council for Teacher Education (hereinafter referred to as "NCTE") inasmuch as, NCTE provides T.E.T. qualification as a necessary qualification for appointment of Primary Teachers but simultaneously provides that it shall not guarantee appointment to any person merely on account of possession of such qualification. The Rules do not go contrary thereto but only provide that before a candidates is to be considered by Selection Committee, list of candidates, who have applied for appointment to the post of Assistant Teacher, shall be prepared and in that preparation of list, T.E.T. marks shall be the criteria.� It� is� like� a� guideline� for� ascertaining� zone� of 
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consideration and field of eligibility but by itself does not provide any guarantee for appointment. The Rules thus cannot be said to be contrary to NCTE guidelines.
3.��� No interference therefore called for.
4.��� Dismissed.
Order Date :- 2.1.2012
KA


However many candidates informed/suggested that 100% weighatge has no meaning of weightage.
I also found that many States in India using some percentage of TET marks for weightage purpose.

Mera purpose na to TET merit dharee ko support karna hai na hee Gunank Dharee aur na hee kisee Shiksha   Mitra ke against hai. jaisee information aatee hai aur jaise conclusion nikalte dikhayee dete hain. Blog par share kar diye jaate hain.

Laste year se huee gatividhiyon va TB ka Nirnay dekhte hue. Blog ka sochna hai ki shayad State Govt. aagamee bhrtee mein - TET marks ka thoda sa weightage + Acad marks ka weighatge bhrtee mein shamil kar saktee hai.
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Other Points of Triple Becnh -


The questions that have been therefore framed by us are answered as follows:-

1. The teacher eligibility test is an essential qualification that has to be possessed by every candidate who seeks appointment as a teacher of elementary education in Classes 1 to 5 as per the notification dated 23.8.2010 which notification is within the powers of the NCTE under Section 23(1) of the 2009 Act.

2. Clause 3(a) of the notification dated 23.8.2010 is an integral part of the notification and cannot be read in isolation so as to exempt such candidates who are described in the said clause to be possessed of qualifications from the teacher eligibility test.

3. We approve of the judgment of the division bench in Prabhakar Singh's case to the extent of laying down the interpretation of the commencement of recruitment process under Clause 5 of the notification dated 23.8.2010 but we disapprove and overrule the ratio of the said decision in relation to grant of exemption and relaxation from teacher eligibility test to the candidates referred to in Clause 3 (a) of the notification dated 23.8.2010, and consequently, hold that the teacher eligibility test is compulsory for all candidates referred to in Clause 1 and Clause 3 (a).

Let the judgement be accordingly placed before the respective benches for appropriate orders.



To Read Complete Judgement of Triple Bench , Click Here -
http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/WebShowJudgment.do?judgmentID=2617665


Saturday, June 1, 2013

UPTET : यूपी: टीईटी के बिना नहीं बन सकेंगे सहायक अध्यापक


UPTET : यूपी: टीईटी के बिना नहीं बन सकेंगे सहायक अध्यापक





सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उठे विवाद का अंत हो गया है।

हाईकोर्ट की फुलबेंच ने कहा है कि सहायक अध्यापक नियुक्त होने के लिए टीईटी अनिवार्य है।

परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसा कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं हो सकता जो टीईटी की अर्हता न रखता हो।

फुलबेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा प्रभाकर सिंह केस में दिए निर्णय के उस हिस्से को अमान्य कर दिया है जिसमें बीएड डिग्री धारकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी गई थी।

टीईटी को मात्र अर्हता परीक्षा बताने पर राज्य सरकार के दावे को खारिज करते हुए फुलबेंच ने कहा कि यह शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता के साथ ही एक अनिवार्य योग्यता है।

न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी, न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ ने एनसीटीई द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना को वैध करार दिया है।

फैसले में कहा गया है कि 23 अगस्त की अधिसूचना की उपधारा 3(अ) उसका एक हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि इस उपधारा में वर्णित वर्ग टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त होगा।

23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी होने के बाद नियुक्त हुए अध्यापकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि कानून जिस रूप में है उसी रूप में लागू होना चाहिए। राज्य सरकार की लापरवाही के कारण उसमें ढील नहीं दी जा सकती है।

फुलबेंच ने प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ द्वारा एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने हेतु अधिकृत करार देने के निर्णय को सही ठहराया है।

इस बात को भी सही माना है कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 लागू होने के बाद न्यूनतम अर्हता निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार मुक्त नहीं है। मगर इसी फैसले के उस हिस्से को गलत बताया जिसमें बीएड डिग्री धारकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं माना गया है

शिक्षकों की नियुक्ति पर खंडपीठ करेगी फैसला

फुलबेंच द्वारा सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता घोषित करने के बाद प्रदेश में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने की दिशा साफ हो गई है।

मगर 72,825 सहायक अध्यापकों की भर्ती किस प्रकार से होगी इसका निर्णय खंडपीठ करेगी। फुलबेंच ने इस मामले को वापस उसी खंडपीठ के समक्ष भेज दिया है, जहां प्रकरण लंबित था।

वहां विवाद इस बात पर है कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का आधार टीईटी मेरिट होगी या अभ्यर्थियों का शैक्षणिक गुणांक


News Sabhaar / Source : Amar Ujala (1.6.2013)
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See important points of Judgement -
Most Important Points Which Arises From This Decision is -
We wish to clarify that the binding effect of the notifications and the guidelines is such that the weightage which is contemplated under the guidelines dated 11th February, 2011 cannot be ignored. The minimum score that is required of a candidate is 60% to pass the teacher eligibility test. A concession of 5% has been made in favour of the reserved category candidates including the physically challenged and disabled persons.
This norm therefore cannot be diluted. Apart from this, the State Government has to take notice of the fact that weightage has to be given in the recruitment process as well. It is for the State Government to suitably adopt the said guidelines and we do not wish to add anything further at this stage as we are only concerned with the essentiality of the qualification of the teacher eligibility test to be possessed by any candidate aspiring to be appointed as a teacher. 
We wish to make it clear that the law has to be followed in the manner in which it has been legislated. It cannot be diluted on account of the inaction of the State. In such circumstances all teachers whose appointment relate to the period after 23.8.2010 have to be possessed of TET.


The questions that have been therefore framed by us are answered as follows:-

1. The teacher eligibility test is an essential qualification that has to be possessed by every candidate who seeks appointment as a teacher of elementary education in Classes 1 to 5 as per the notification dated 23.8.2010 which notification is within the powers of the NCTE under Section 23(1) of the 2009 Act.

2. Clause 3(a) of the notification dated 23.8.2010 is an integral part of the notification and cannot be read in isolation so as to exempt such candidates who are described in the said clause to be possessed of qualifications from the teacher eligibility test.

3. We approve of the judgment of the division bench in Prabhakar Singh's case to the extent of laying down the interpretation of the commencement of recruitment process under Clause 5 of the notification dated 23.8.2010 but we disapprove and overrule the ratio of the said decision in relation to grant of exemption and relaxation from teacher eligibility test to the candidates referred to in Clause 3 (a) of the notification dated 23.8.2010, and consequently, hold that the teacher eligibility test is compulsory for all candidates referred to in Clause 1 and Clause 3 (a).

Let the judgement be accordingly placed before the respective benches for appropriate orders.

UPTET : Double Standard of Bhrtee Supporter


UPTET : Double Standard of Bhrtee Supporter



काफी सारे लोग छद्म भर्ती सपोर्टर बने हुए है 
जब भर्ती की बात गुणांक / अकैड मेरिट से होती है तो कहते हैं की भर्ती होने दो , चाहे कैसे भी हो । 
लेकिन जब बात टीईटी मेरिट की आती है तो कहते हैं कि टीईटी मेरिट  से कैसे भर्ती हो सकती  है । 
और ये तथा कथित भर्ती सपोर्टर दोहरा माप दंड अपनाये हुए हैं । 

मेरा अकैड मेरिट वालों से कोई विरोध नहीं है लेकिन जो सही बातें हैं उसको सपार्ट करना बेहद जरूरी है ,
अन्यथा रास्ता भटक जायेंगे । 
आगामी कोई भी भर्ती एन सी टी ई नियमों (मतलब टीईटी मार्क्स वेटेज + गुणांक आदि ) के अनुरूप आती है तो मुझे बेहद खुशी होगी क्योंकि उस से आप की भर्ती उलझेगी नहीं 

BLOG Analysis about Below UPTET News


BLOG Analysis about Below UPTET News
UPTET : 72,825 शिक्षकों की काउंसिलिंग इसी माह

Is news se Bhrmit Hone ki Jaroorat nahin hai ki - 72825 bhrtee ki counslling iseee mah se shuru ho jayegee,
Jagran mein ye jo news aayee hai vhe Sunil Kumar ji ka Court ka order dekhe bager aayee hai aur logon ko  pareshaan hone ki jaroorat nahin hai.

Jagran, Hindustan both are reputed news papers.

Basic Shiksha Pramukh Sachiv Sunil Kuma ka jo bayan  Hindustan News Paper mein aayaa hai usmein likhaa hai - ki Sunil Kumar ji ne abhee Allahaabd High Court ki Triple Bench ka Order Dekhaa Nahin Hai aur yahee baat is neeche dee gayee news mein bhee hai -
"उनका कहना है कि अभी हमनें कोर्ट का आदेश देखा नहीं है " 


See Complete Judgement of Allahaabd High Court Here - http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/WebShowJudgment.do?judgmentID=2617665



लखनऊ : प्राथमिक व उच्च प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षकों की भर्ती के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य ठहराये जाने के हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। पूर्ण पीठ के इस निर्णय से अदालती दांव पेंच में अब तक उलझी 72,825 शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में होने वाली इन नियुक्तियों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग इसी माह 15 जून के आसपास काउन्सिलिंग शुरू कराने की तैयारी कर रहा है। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में रिक्त 72,825 शिक्षकों के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए प्रदेश के सभी जिलों में कुल मिलाकर तकरीबन 69 लाख आवेदन आये थे। काउन्सिलिंग के पहले दिन ही बीती चार फरवरी को अदालत ने भर्ती पर रोक लगा दी थी। अब भर्ती का रास्ता साफ होने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग नये सिरे से काउन्सिलिंग शुरू करने की योजना बना रहा है। 1इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने की वजह यह थी कि एक-एक अभ्यर्थी ने कई जिलों में आवेदन किया है। जाहिर है कि अपनी पसंद के किसी एक जिले में चयन होने के बाद अभ्यर्थी अन्य जिलों की काउन्सिलिंग में हिस्सा नहीं लेगा। यदि अन्य जिलों में उसका चयन हुआ भी होगा तो वह वहां अपना दावा छोड़ेगा। ऐसी हालत में वे जिले जहां सीटें कम हैं, वहां काउन्सिलिंग एक राउंड में खत्म होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में जहां सीटें ज्यादा हैं, काउन्सिलिंग कई राउंड में चलेगी। 

प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने बताया कि ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए काउन्सिलिंग के दो राउंड के बीच कम से कम एक हफ्ते का समय देना होगा। इस हिसाब से चयन प्रक्रिया पूरी होने में ढाई महीने लगेंगे। उनका कहना है कि अभी हमनें कोर्ट का आदेश देखा नहीं है लेकिन इस बारे में जो जानकारी मिली है उसके आधार पर हम चाहेंगे कि विभाग को जल्द से जल्द यह शिक्षक मिल जाएं। इसलिए हमारी कोशिश होगी कि काउन्सिलिंग की प्रक्रिया हम 15 जून के आसपास शुरू कर दें।

 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षकों की भर्ती के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य ठहराये जाने के हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। पूर्ण पीठ के इस निर्णय से अदालती दांव पेंच में अब तक उलझी 72,825 शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। 1परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में होने वाली इन नियुक्तियों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग इसी माह 15 जून के आसपास काउन्सिलिंग शुरू कराने की तैयारी कर रहा है। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में रिक्त 72,825 शिक्षकों के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए प्रदेश के सभी जिलों में कुल मिलाकर तकरीबन 69 लाख आवेदन आये थे। काउन्सिलिंग के पहले दिन ही बीती चार फरवरी को अदालत ने भर्ती पर रोक लगा दी थी। अब भर्ती का रास्ता साफ होने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग नये सिरे से काउन्सिलिंग शुरू करने की योजना बना रहा है। 1इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने की वजह यह थी कि एक-एक अभ्यर्थी ने कई जिलों में आवेदन किया है। जाहिर है कि अपनी पसंद के किसी एक जिले में चयन होने के बाद अभ्यर्थी अन्य जिलों की काउन्सिलिंग में हिस्सा नहीं लेगा। यदि अन्य जिलों में उसका चयन हुआ भी होगा तो वह वहां अपना दावा छोड़ेगा। ऐसी हालत में वे जिले जहां सीटें कम हैं, वहां काउन्सिलिंग एक राउंड में खत्म होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में जहां सीटें ज्यादा हैं, काउन्सिलिंग कई राउंड में चलेगी। 1प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने बताया कि ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए काउन्सिलिंग के दो राउंड के बीच कम से कम एक हफ्ते का समय देना होगा। इस हिसाब से चयन प्रक्रिया पूरी होने में ढाई महीने लगेंगे। उनका कहना है कि अभी हमनें कोर्ट का आदेश देखा नहीं है लेकिन इस बारे में जो जानकारी मिली है उसके आधार पर हम चाहेंगे कि विभाग को जल्द से जल्द यह शिक्षक मिल जाएं। इसलिए हमारी कोशिश होगी कि काउन्सिलिंग की प्रक्रिया हम 15 जून के आसपास शुरू कर दें

News Source / Sabhaar : Jagran Epaper Allahabad Pg. No. 12 , (1.6.2013)
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Statement of  Sunil Kumar , Pramukh Basic Shiksha Sachiv Published in Hindustan Epaper (1.6.2013) -


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 According to Blog analysis - TB Decision mein bataya gaya hai ki -
Base of Selection / Other Writs ko Vapas Appropriate Benches mein Bhej Diyaa gayaa hai ,

See here - http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/WebShowJudgment.do?judgmentID=2617665 - Let the judgement be accordingly placed before the respective benches for appropriate orders

UPTET 72825 Teacher Recruitment : News By Various Papers Regarding Triple Bench Decision on 31st May 2013


UPTET  72825 Teacher Recruitment : News By Various Papers Regarding Triple Bench Decision on 31st May 2013




Amar Ujala News -

•हाईकोर्ट ने कहा, टीईटी मात्र अर्हता नहीं अनिवार्य योग्यता
•अगस्त 2010 के बाद नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए भी जरूरी


सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए टीईटी अनिवार्य
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उठे विवाद का अंत हो गया है। हाईकोर्ट की फुलबेंच ने कहा है कि सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए टीईटी अनिवार्य है। परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसा कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं हो सकता जो टीईटी की अर्हता न रखता हो। फुलबेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा प्रभाकर सिंह केस में दिए निर्णय के उस हिस्से को अमान्य कर दिया है जिसमें बीएड डिग्री धारकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी गई थी।
टीईटी को मात्र अर्हता परीक्षा बताने के राज्य सरकार के दावे को खारिज करते हुए फुलबेंच ने कहा कि यह शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता के साथ ही एक अनिवार्य योग्यता है। न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी, एपी साही और पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ ने एनसीटीई द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना को वैध करार दिया है।

News Source / Sabhaar : Amar Ujala (1.6.2013)
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Below News Published in Jagran Epaper -

शिक्षक भर्ती में टीईटी जरूरी

स्कूल माता-पिता का आउटलेट नहीं है। ऐसी संस्था हैं जिसमें बेहतर मानव उत्पन्न होता है। यदि बच्चा गलत रास्ते पर जाता है तो एक अच्छे मानव की मौत होती है। 
बच्चों का उचित प्रशिक्षण न होना वैसा ही है, जैसे बिना जीन का घोड़ा जिस पर सवारी मुश्किल है। शिक्षक की मदद से बच्चा मानवता के उच्चतम लक्ष्य हासिल कर सकता है।
शिक्षा मित्र व प्रेरक के जरिए प्राथमिक शिक्षा की अस्थायी पृष्ठभूमि में अध्यापकों की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
23 अगस्त 10 के बाद नियुक्त अध्यापकों को पास करना होगा टीईटी 


जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद 1इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता माना है। अदालत ने कहा है कि बिना टीईटी पास किए किसी को भी सहायक अध्यापक नियुक्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने के कानून को लागू करने की दिशा स्पष्ट हो गई है और शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने प्रभाकर सिंह केस में दिए गए फैसले कि एनसीटीई व केंद्र सरकार को अध्यापक नियुक्त की योग्यता मानक तय करने का अधिकार है, को सही माना। किंतु इसी फैसले से बीएड डिग्रीधारकों को बिना टीईटी पास किए नियुक्ति पाने के लिए योग्य करार देने को सही नहीं माना और कहा कि शैक्षिक योग्यता के अलावा प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि टीईटी केवल अर्हता परीक्षा नहीं है अपितु यह सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता है। भारत सरकार की गाइड लाइन व अधिसूचना के अनुसार टीईटी पास करने के लिए सामान्य को 60 फीसद व आरक्षित वर्ग के लिए इसमें 5 फीसद की छूट दी गई है। कोर्ट ने इसे बाध्यकारी माना और कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में ढील नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 23 अगस्त 10 की अधिसूचना बाध्यकारी है। इस तारीख के बाद नियुक्त अध्यापकों को टीईटी पास करना होगा। 23 अगस्त की अधिसूचना में ही टीईटी को बाध्यकारी माना गया है।1यह निर्णय न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी साही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ ने शिवकुमार शर्मा सहित अन्य याचिकाओं व अपीलों को एक साथ निर्णीत करते हुए दिया है। कोर्ट ने याचिकाओं को तदनुसार निर्णीत करने के लिए संबंधित पीठ को वापस कर दिया है। हाईकोर्ट ने एनसीटीई की 23 अगस्त 10 की अधिसूचना को वैध करार दिया है और कहा है कि क्लॉज 3(अ) अधिसूचना का हिस्सा है। इसे अलग से नहीं पढ़ा जा सकता। इस क्लॉज में बीएड डिग्रीधारकों को नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण दिए जाने की छूट दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 लागू होने के बाद सहायक अध्यापक की नियुक्ति के मानक तय हो गए हैं। उन मानकों को शिथिल करने की छूट नहीं दी जा सकती






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Hindustan Epaper News -
















News Source / Sabhaar : Hindustan Epaper (1.6.2013)
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What I found in TB Decision is -

Most Important Points Which Arises From This Decision is -
We wish to clarify that the binding effect of the notifications and the guidelines is such that the weightage which is contemplated under the guidelines dated 11th February, 2011 cannot be ignored. The minimum score that is required of a candidate is 60% to pass the teacher eligibility test. A concession of 5% has been made in favour of the reserved category candidates including the physically challenged and disabled persons.
This norm therefore cannot be diluted. Apart from this, the State Government has to take notice of the fact that weightage has to be given in the recruitment process as well. It is for the State Government to suitably adopt the said guidelines and we do not wish to add anything further at this stage as we are only concerned with the essentiality of the qualification of the teacher eligibility test to be possessed by any candidate aspiring to be appointed as a teacher. 
We wish to make it clear that the law has to be followed in the manner in which it has been legislated. It cannot be diluted on account of the inaction of the State. In such circumstances all teachers whose appointment relate to the period after 23.8.2010 have to be possessed of TET.



The questions that have been therefore framed by us are answered as follows:-

1. The teacher eligibility test is an essential qualification that has to be possessed by every candidate who seeks appointment as a teacher of elementary education in Classes 1 to 5 as per the notification dated 23.8.2010 which notification is within the powers of the NCTE under Section 23(1) of the 2009 Act.

2. Clause 3(a) of the notification dated 23.8.2010 is an integral part of the notification and cannot be read in isolation so as to exempt such candidates who are described in the said clause to be possessed of qualifications from the teacher eligibility test.

3. We approve of the judgment of the division bench in Prabhakar Singh's case to the extent of laying down the interpretation of the commencement of recruitment process under Clause 5 of the notification dated 23.8.2010 but we disapprove and overrule the ratio of the said decision in relation to grant of exemption and relaxation from teacher eligibility test to the candidates referred to in Clause 3 (a) of the notification dated 23.8.2010, and consequently, hold that the teacher eligibility test is compulsory for all candidates referred to in Clause 1 and Clause 3 (a).

Let the judgement be accordingly placed before the respective benches for appropriate orders.