Tuesday, June 3, 2014

सुप्रीम कोर्ट द्वारा भर्ती की समय सीमा समाप्ति की और बढ़ने पर टी ई टी अभ्यर्थीयों का लखनऊ में प्रदर्शन


सुप्रीम कोर्ट द्वारा भर्ती की समय सीमा समाप्ति की और बढ़ने पर टी ई टी अभ्यर्थीयों का लखनऊ में प्रदर्शन

 Counseling of 72825 Teacher as per Supreme Court Order





टी ई टी अभ्यर्थीयों ने 2.5 साल का लम्बा इन्तजार झेला ,
हाई कोर्ट में सिंगल , डबल और ट्रिपल बेंच में केस जीतने के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी केस जीते ,
और सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत 3 महीने में  शिक्षको की भर्ती पूरी करने का आदेश दिया ।
इस अंतरिम आदेश की समय सीमा भी पूरी होने जा रही है ,
दुसरी तरफ टी ई टी अभ्यर्थीयों का धैर्य जवाब देने लगा और  वे लखनऊ में जुटकर काउन्सलिंग की तिथि जानने को पहुँच गए
लेकिन अभी tak iske समाधान होने की खबर नहीं आयी है


 



क्या है टी ई टी परीक्षा :
मायावती सरकार ने टी ई टी परीक्षा को एन सी टी ई नियमो (संविधान के तहत आर टी एक्ट के द्वारा भर्ती के नियम तय करने की शक्ति
केंद्र सरकार की संस्था एन सी टी ई को  दी है  )के तहत भर्ती परीक्षा का आयोजन किया था ,
और उस भर्ती परीक्षा के खिलाफ बहुत से अभ्यर्थीयों ने इलाहबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी
लेकिन इलाहबाद हाई कोर्ट ने याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए , टी ई टी परीक्षा द्वारा बनने वाली मेरिट से भर्ती को सही माना था और इसमें
कहीं भी एन सी टी ई के नियम का उल्लंघन नहीं बताया था

एन सी टी ई नियम कहते हैं :
1. टी ई टी परीक्षा के  अंको को चयन / भर्ती में वेटेज दिया / महत्व जाये और
2 . टी ई टी परीक्षा में अभ्यर्थी अंक वृद्दि हेतु बार बार बैठ सकता है
इसको साल में दो बार करने का प्रावधान किया गया था , और केंद्र सरकार इसको सी टी ई टी के नाम से साल में दो बार आयोजित  करती है
अगर राज्य सरकार टी ई टी परीक्षा न  करा पाये तो वह केंद्र सरकार की सी टी ई टी परीक्षा को उसका स्थान दे सकती है और उसके अंको से चयन कर सकती है

मायावती सरकार के परीक्षा कराने के बाद 72825 शिक्षकों की भर्ती के  लिए varsh 2012 mein विज्ञापन निकाला  और एन सी टी ई की समय सीमा 1 जनवरी 2012 को ध्यान में रखकर 31  दिसंबर 2011 तक भर्ती संपन्न करने की अंतिम तिथि रखी
इसके बाद कोर्ट केसों के सिल सिले चलने लगे , इस बीच उत्तर प्रदेश में सरकार बदली , और उसने टी ई टी परीक्षा आयोजित कराने वाले  माध्यमिक शिक्षा 
निदेशक संजय मोहन से कुछ लाख रूपए बरामद किये , माना गया की यह रूपए टी ई टी परीक्षा में धांधली के लिए लिए गए हैं

और उत्तर प्रदेश सरकार ने भर्ती के नियम बदल दिए ।

इस बीच टी ई टी अभ्यर्थीयों ने कोर्ट में लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी , और यह कानूनी लड़ाई लम्बे समय तक इलाहबाद हाई कोर्ट की  सिंगल ,डबल और ट्रिपल बेंच में चली । इलाहबाद हाईकोर्ट टी ई टी अभ्यर्थीयों की बात को सही मानते हुए उनकी भर्ती 3 महीने में करने का आदेश दिया ।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गयी , जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च 2014 ४ को (1-2 हियरिंग के बाद) टी ई टी अभ्यर्थीयों को राहत देते हुए अपने अतंरिम आदेश में 72825 शिक्षकों की भर्ती 12 हफ्ते में पूरी करने का आदेश दे दिया ।

इधर समय सीमा गुजरती जा रही थी , दुसरी तरफ अभ्यर्थीयों का धैर्य जवाब दे रहा था

किसी भी तरह की काउंसलिंग  / भर्ती से सम्बंधित शासनादेश जारी न होने पर , अभ्यर्थी बड़ी संख्या में लखनऊ पहुँच गए

Photo Sabhaar : Bhaskar.com


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