Sunday, April 15, 2012

UPTET : RTE implementation is Big Challenge


आरटीई लागू करना बड़ी चुनौती  
(UPTET : RTE implementation is Big Challenge )

देहात ही नहीं शहरी क्षेत्र के स्कूलों की दशा भी है खराब
बिजनौर।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राइट टू एजूकेशन को जहां निजी स्कूलों में लागू करने की चुनौती बनी हुई है वहीं सरकारी पाठशालाओं में भी इस पर अमल करना कठिन लग रहा है। आलम यह है कि देहात के स्कूलों में ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों के स्कूलों की दशा भी खराब है। यहां कई पाठशालाएं किराए के भवन में चल रही हैं तो कई भवनहीन हो गई है।
शिक्षा अधिकार अधिनियम को निजी स्कूलों में लागू करना तो चुनौती है ही ,लेकिन सरकारी पाठशालाओं में भी कम मुसीबत नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में कहीं शिक्षक हैं तो कहीं छात्र नहीं। नगर के स्कूलों में खेल के मैदान तो दूर अपने भवन तक नहीं हैं। कई भवन जर्जर हाल पड़े हैं। ऐसे में आरटीई लागू करने में भारी समस्या होगी। प्राइमरी पाठशाला नई बस्ती दो व चार नंबर किराए के भवन में चल रही है जबकि रामलीला मैदान में भी किराए के भवन में स्कूल चलाया जा रहा है। बाजार शंभा प्राइमरी स्कूल एक व दो भवनहीन होने के कारण दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिए गए हैं। मुहल्ला अचारजान व प्राइमरी मुहल्ला जाटान का स्कूल भी भवनहीन हो गया है, जिन्हें दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया गया है। उधर धामपुर के नगर क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल बिना छत के खुले आसमान में चल रहे हैं। जबकि तिलक भवन में चार प्राइमरी स्कूल एक साथ संचालित किए जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की माने तो कई बार इन स्कूलों की स्थिति के बारे में शासन को लिखा गया है, लेकिन अभी तक दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।

जिले में हैं शिक्षकों का टोटा -
बिजनौर। टीईटी परीक्षा विवाद में पड़ जाने से सरकारी स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। शिक्षा सत्र 2011-12 की 20 मई को समाप्ति के बाद जिले में 30 जून को करीब 225 अध्यापक व अध्यापिकाएं सेवानिवृत्त हो रहे हैं जबकि नई शिक्षक भर्ती की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में परिषदीय स्कूलों में शिक्षक ों की पूर्ति होना संभव नहीं है


News : Amar Ujala (15.4.12)

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